अपना खुन पसीना बहा कर जो जमीन को हरी-भरी उपजाऊ बनाता है वो किसान ही तो है जो हमें दो वक्त की रोटी देता है...

सुन लेंगे एक दिन प्रभु तुम्हारी भी, श्रद्धा से एक बार पुकारो तो सही..

अहंकार का बस इतना ही सच है दिल से जुड़े रिश्ते भी खा जाता है।

मोहब्बत ज़िंदगी के फैसलों से लड़ नहीं सकती.... किसी को खोना पड़ता है.... किसी का होना पड़ता है....!!

अगर पुरखों ने खेत में हल चलाकर "कलम" पकड़ने के लायक बनाया हैं, तो कलम का फर्ज हैं कि अब वह "हल" का कर्ज उतारे।

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