अहंकार का बस इतना ही सच है दिल से जुड़े रिश्ते भी खा जाता है।

मोहब्बत ज़िंदगी के फैसलों से लड़ नहीं सकती.... किसी को खोना पड़ता है.... किसी का होना पड़ता है....!!

अगर पुरखों ने खेत में हल चलाकर "कलम" पकड़ने के लायक बनाया हैं, तो कलम का फर्ज हैं कि अब वह "हल" का कर्ज उतारे।

सारे फरिश्ते मुझे ही मिले हैं ज़िंदगी में, कोई गलती करता ही नहीं, मेरे सिवाय...

तुम छाये रहना मुझपर बसंत की बहार बनकर मैं खिला रहूँगा तुझमें फूल 'पलाश' का बनकर

Translate »