कितने आसान हो गए हैं रिश्ते... जब मन करे बनाओ, रखो, डिलीट कर दो...

उदासियों में कोई हमसफ़र नहीं होता , तमाम लोग ख़ुशी में शरीक होते हैं ।।

एक दिन जियूंगा अपने लिए भी , ये सोच कर पिता ने सारी उम्र गुज़ार दी ।।

रुतबा रोब का होना चाहिए, अकड़ तो कुत्ते की पूंछ में भी होती हैं…

भूख से डगमगा रहें हैं पांव और बाज़ार से गुजरना है.....!!

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