ये कागज की डिग्रियां नही करती फैसला संस्कारों का,आपकी तरबियत बताती है खानदान कैसा है

अहंकार भी आवश्यक है,जब बात अधिकार, चरित्र या सम्मान की हो...

जो समझ सकें वहीं अपना हैं,बाकी सब सपना है...

दुश्मनो से निपटना तो हम खूब जानते है...मगर मेरे कुछ अपने है जो मोहब्बत से वार करते है...

छोड़ने वाले छोड़ जाते है मुक़ाम कोई भी हो,निभाने वाले निभा जाते है हालात कोई भी हो

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