सुनो प्रिय, आप पुष्प नहीं पुस्तकें लाना मेरे लिए !!

बोले हुए अल्फाज़, गुजरा हुआ वक्त, टूटा हुआ भरोसा, कभी वापस नही आता...

सही वक़्त पर करवा देंगे हदों का एहसास कुछ तालाब ख़ुद को समंदर समझ बैठें हैं।

गोबर पर चांदी का वर्क लगाने से हलवा नहीं बनता!!

हँसता रहता हु….क्यूँकि मुझे ‘आज’ की फ़िक्र हैं, ‘कल’ की नहीं

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