सही वक़्त पर करवा देंगे हदों का एहसास कुछ तालाब ख़ुद को समंदर समझ बैठें हैं।

गोबर पर चांदी का वर्क लगाने से हलवा नहीं बनता!!

हँसता रहता हु….क्यूँकि मुझे ‘आज’ की फ़िक्र हैं, ‘कल’ की नहीं

जुल्म की छाती पर रख कर पांव हम लड़ते रहेंगे, हक न्याय का मिलने तक हम लड़ते रहेंगे...

खफा नहीं हूं तुझसे ए जिन्दगी.. बस जरा दिल लगा बैठा हूं इन उदासियों से..!!

Translate »