मैं मुंतजिर हुं तेरा तू हर दफा चाहिए जैसे किसी बीमार को दवा चाहिए

खामोशी से खत्म हुए रिश्ते, मन में गहरा शोर छोड़ जाते हैं।

दिलों के दरवाज़े नहीं होते, बस सरहदें होती हैं।

हर किसी से बिखर जाऊँ।। इतनी हल्की हमारी हस्ती नहीं।।

रूपया व्यक्ति का, रवैया बदल देता हैं।

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