"मुझे भी सिखा दो वादों से मुकर जाना, बहुत थक गया हूँ निभाते निभाते".......!!

रौशनी लाख खफ़ा हो भले चरागों से, अँधेरों की हिमायती तो नहीं हो सकती !!

मेरे कांच जैसे दिल मे, कुछ पत्थर जैसे लोग रहते है। ❤️‍🩹

अपने हौसलों को , ये खबर करते रहो.. जिंदगी मंजिल नहीं , सफर है ‘ चलते रहो..!!

न तो ईश्वर है न आत्मा होती है, पुनर्जन्म भी नहीं होता है, जो है बस यही जिंदगी है। गौतम बुद्ध

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