थमती नहीं है जिंदगी यहां किसी के बिना, पर गुजरती भी नहीं है अपनों के बिना।।

मैं रास्ते भूलता हूँ और इसीलिए नए रास्ते मिलते हैं

शहर की धूप से परेशान जब मैं छांव ढूंढती हूं,, सुकून के लिए तब मैं अपना गांव ढूंढती हूं,,

"मुझे भी सिखा दो वादों से मुकर जाना, बहुत थक गया हूँ निभाते निभाते".......!!

रौशनी लाख खफ़ा हो भले चरागों से, अँधेरों की हिमायती तो नहीं हो सकती !!

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