दोनो मज़बूर थे अपने अपने दायरों मे...ना वो बता सकी ना हम जता सके...

सोचो तो सारी उमर मुहब्बत में कट गई,देखो तो एक शक्स भी मेरा नहीं हुआ ।।

आज नही तो कल किया है... स्त्री ने मर्द के साथ हमेशा छल किया है...

प्राण देना प्रेम नहीं...किसी के प्राण बन जाना प्रेम है...।

देखा है ज़िंदगी को कुछ इतने क़रीब से...चेहरे तमाम लगने लगे हैं अजीब से...

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