आज नही तो कल किया है... स्त्री ने मर्द के साथ हमेशा छल किया है...

प्राण देना प्रेम नहीं...किसी के प्राण बन जाना प्रेम है...।

देखा है ज़िंदगी को कुछ इतने क़रीब से...चेहरे तमाम लगने लगे हैं अजीब से...

ये कागज की डिग्रियां नही करती फैसला संस्कारों का,आपकी तरबियत बताती है खानदान कैसा है

अहंकार भी आवश्यक है,जब बात अधिकार, चरित्र या सम्मान की हो...

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