जिंदगी रोज़ कोई ताज़ा सफ़र मांगती है,
और बेचारी थकान शाम को घर मांगती है।
मैं और मेरा रेड कार्पेट
अक्सर ये बातें करते हैं
तू होता तो ऐसा होता
तू होता तो वैसा होता
तू बीच की रेत पे बिछता, तू गार्डन में फैला होता
तू समंदर के तल पे लेटकर मेरी ईगो सहला...
आसानी से मिलने वाली चीजें
हमेशा खतरों से भरी होती है..
अहंकार भी आवश्यक हैं,
जब बात आधिकार चरित्र एवं सम्मान की हो...