मौत आज़मा रही थी परिंदे को, ईश्वर भी करामात दिखा रहा था दम तोड़ रही थी इंसानियत, जब उसे इंसान मरना सिखा रहा था

शराब तुम्हारा कुछ नहीं बिगाड़ेगी, तुम एक शख्स के नशे में मरोगे..

भर जाएँगे जब ज़ख़्म तो आऊँगा दोबारा मैं हार गया जंग मगर दिल नहीं हारा

जान लेनी थी तो साफ़ कह देते, क्या ज़रूरत थी मुस्कुराने की

पुरुषों ने प्यार में ताजमहल बनवाया, नस काटी,पहाड़ तोड़े...स्त्रियों ने क्या किया

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