भर जाएँगे जब ज़ख़्म तो आऊँगा दोबारा मैं हार गया जंग मगर दिल नहीं हारा

जान लेनी थी तो साफ़ कह देते, क्या ज़रूरत थी मुस्कुराने की

पुरुषों ने प्यार में ताजमहल बनवाया, नस काटी,पहाड़ तोड़े...स्त्रियों ने क्या किया

तुम्हें गुरुर है तुम्हारा वक्त बोल रहा है! हमें यकीन है हमारा सब्र बोलेगा!!

दुख, फरेब, गरीबी और बदनसीबी को मापना सिखाता हूं, अपनी कलम कि धार से, मैं समाज को आईना दिखाता हूं..

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