बस पेड़ गांव के हिस्से में होते है और फल शहर को मिल जाते हैं ।

इतने कमजोर नहीं की, वफादार होने का ऐलान करें, हमें यकीन है अपने किरदार पर, जो "खोएगा", "ढूँढता" फिरेगा...

समझदार को मूर्ख कहना उतना ख़तरनाक नहीं जितना मूर्ख को मूर्ख कहना।

नैतिकता, समानता तथा न्याय के सिद्धांत कैलेंडर के साथ नहीं बदलते।

फस गया हूँ जिंदगी के कुरुक्षेत्र में अभिमन्यु की तरफ , बचाने कोई आने वाला नही और मैदान मैं छोड़ूंगा नही...

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