सियासत को लहू पीने की लत है , वरना हमारे मुल्क में सब खैरियत है ।।

सुंदरता का मोह त्याग चूके है हम , जिसे पसंद आना था आ चूके है हम...

नहीं है प्यार उससे अब नहीं है मगर वो शख़्स प्यारा आज भी है

सुखी वो नहीं जिसके पास सब कुछ है, सुखी वो है जिसके पास सब कुछ है।

उठ मन्दिर के दरवाजे से, जोर लगा खेतों में अपने; नेता नहीं, भुजा करती है, सत्य सदा जीवन के सपने।

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