मेरे हिस्से में भी ये दिन आए.... हथेली मेरी हो और अपने नाम की मेहंदी तू लगाए !

तेरा तुझ को अर्पण.. क्या लागे मेरा..

कितना ख़ास बनाया था हमें ईश्वर ने हम कितने आम बन गए हैं मशीनों से ग़ुलामी कराते कराते मशीनों के ग़ुलाम बन गए हैं

हर प्रशंसा करने वाला शुभचिंतक नहीं होता है.!

मजबूर नहीं करूँगा किसी को बात करने के लिए, जिसको जाना है वो चला जाये जो मेरा है वो ठहर जायेगा !!

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