प्यास बुझने के बाद खाली बोतल भी बोझ लगने लगती है

ऐसी बाँणी बोलिये, मन का आपा खोइ। अपना तन सीतल करै, औरन कौं सुख होइ॥

उम्र बढ़ती, प्यार बढ़ता, अरमां जवां और दुनिया हसीन हो जाती, तुम झरोखे से कुबूल कर लेती मुझको, तो जन्नत अधीन हो जाती !

हमको जज़्बात का इज़हार ना करना आया प्यार करते रहे इक़रार ना करना आया

संघर्ष में तुम अनाथ हो मित्र, क़ाफ़िला तो सफलता के बाद उमड़ता है!!

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