गम़ ये नहीं के लोग हमारे खिलाफ़ बोलते हैं! ख़ुशी ये है के उन्हें बोलना हम ने सिखाया था

भिड़ते,टकराते,छील के निकलते हैं रिश्ते, कितने चौराहों से गुजरते है रिश्ते, ज़ख्म जिस्मो पर नजर आते है सारे, कहने को रूह से उतरते है रिश्ते ..

सोच आज दो घड़ी के लिए, वक्त रुकता नहीं किसी के लिए !!

वो अपने ही होते हैं जो लफ्ज़ों से मार देते हैं !

अपनी हालत का ख़ुद एहसास नहीं मुझ को,, मैंने औरों से सुना है के परेशान हूँ मैं...!!

Translate »