छिप गई है हंसी चेहरे की, माथे पर चिंता के निशान है, ज़िम्मेदारियां जेब से बड़ी और साथ सिर्फ़ स्वाभिमान है.

बहुत सीधा सा परिचय है जिंदगी का, आसूं सच्चाई हैं और मुस्कुराहट एक नाटक...

जितने सच्चे रहोगे, उतने ही अकेले रहोगे...

अपनी पीड़ा के लिए संसार को दोष मत दो अपने मन को समझाओ तुम्हारे मन का परिवर्तन ही तुम्हारे दुखों का अंत है !

उम्मीद अच्छी है, पर हर किसी से नहीं...

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