नींदें वापस कर दी हमने,,सुकून भरी रातों को।
किताबों के संग ' हर रात बितानी थी, आँखों को।।
सेजल
बाहर से सुलझा हुआ दिखने के लिए,अंदर से बहुत उलझना पड़ता है….
लगाव कैसा भी हो,,आखिर मेंदुख का कारण हीं बनता है...!!
इलेक्टोरल बॉंड काण्ड के बाद अब तो यह लगने लगा है कि देश छोड़कर जाने वाले अरबपतियों के पीछे का कारण कहीं यह हफ़्ता वसूली ही तो नहीं रही होगी ?
आज की दुनिया का यही कायदा है,
उधर कदम जिधर फायदा है....!!
मैं गांव की अबोध लड़की कहां छुपा पाऊंगी तुम्हारे प्रेम को….मैं मुस्कुराती भी हूं, तो लोगों को शक हो जाता है…
जिसने अपनी सारी "ख्वाहिशें",त्याग दी थी "बीवी" को पढ़ाने में,आज बीवी कि "तरक्की" ने उसे,"देह" त्यागने का उपहार दिया है..!!
"खोना" हमारे जीवन की एक ख़ौफ़नाक क्रिया है,
और मैं क्रिया से बहुत डरता हूँ…!!
मोहब्बत वो बेइंतहा करता है मुझसे सोकरता है ख़ुद बुराई , बता कर बुरा मुझे …
जिस देश में नेता का बच्चा नेता बन जाता हो,
उस देश में ग़रीब का बच्चा ग़रीब बनना तय है।
जेब भरी हो तो रिश्ते बनाने वाले मिलेंगे ,
जेब खाली हो तो सबक सिखाने वाले मिलेंगे ...
वो ख़्वाब रात काचाय साँझ कीबारिश की बूंदें रूमानीवही समां पुरानाधड़कनों से बतियानाबदला नहीं है कुछ भीवही मिज़ाज़ आशिकानाचलो निभाते हैं हम तुमवही पुराना याराना लेकर चुस्कियाँ चाय कीकरेंगे गुफ्तगू शायराना
लबों पे उसके कभी बद्दुआ नहीं होतीबस एक माँ है जो मुझसे ख़फ़ा नहीं होती
मैं क्यों मान लूं तुम नहीं हो मेरे हाथ की लकीरों में, किस्मते तो उनकी भी होती है ना जिनके हाथ नहीं होते
पिता वो दीपक है, जो खुद जल जाता है
और अपने बच्चे को प्रकाश देता है ।।
मेरे दोस्तों सामने हो मंजिल तोरास्ते ना मोड़ना जो भी मन में हो वो सपना मत तोड़ना कदम कदम पर मिलेगी मुश्किल आपको बस सितारे छूने के लिए जमीन मत छोड़ना
आज शाम सजेगी वो दुल्हन सी,
उसका साजन आज फिर से छत पर आएगा....
अपने हाथों से पिलाकर पानी,
वो आज फिर मेरी मोहब्बत को गले लगाएगा..!!
आदतें अलग है हमारी ज़माने से...रिश्ते कम ही सही लेकिन दिल से रखते हैं..!!
कभी कभी दिल यूं भारी होता,
जैसे सीने पे पहाड़ रख दिया हो किसी ने
बाढ़, भूकंप, दंगे, चुनावफ़ौजी सिर्फ़ सरहदों पर नहीं लड़ता