उसको अपना समझने का क्या फ़ायदा,
जिसके अंदर आपके लिए अपनापन ही ना हो।
प्रेम पत्थर बनी देह को भी सुगन्धित कर दे...!!
बदलती दुनिया में अजीब सा फसाना आया है,
किरदार का दौर गया दौलत का ज़माना आया है।
वो हाल है अंदर से कि, बाहर है बयाँ से
सिर्फ सोचे है करके नहीं देखे,
मेरे सारे गुनाह अधूरे है !
जाना पहले तय कर लेते हैं,लोग विदा बाद में लेते हैं.
मुझे अगर कोई समझ पाया है तो वो मैं,
खुद हूं बाकी सब तो बस अंदाज़ा लगा रहे हैं..
शिष्य शिक्षक को शिष्य मानने लगे है ?
ज़िन्दालाश बना देने वाली,
समय की मार से अंंजान था मैं,
रूह सहमी थी परिस्थितियां देखकर,
जिस्म से बेजान था मैं..
ज्ञानी वह है, जो वर्तमान को ठीक प्रकार समझे,
और परिस्थिति के अनुसार आचरण करे।
माफी के हकदार गलती करने वाले होते हैं
चालाकी करने वाले नही !
अगर तुमअपनी सांसों को रोक सकोतभी किसी को रोकना,अगर तुमअपनी धड़कनों को रोक सकोतभी किसी को रोकना,अगर तुमअपने छूटते प्राण को रोक सकोतभी किसी को रोकना,अन्यथाजाने दो जिसे जाना है,
मत करो विलाप किसी के जाने का
~ अम्बष्ठ
रास्ते कभी बंद नहीं होते,
अक्सर लोग हिम्मत हार जाते हैं..!!
प्रेम चतुर्वेदी
तेरे जानें से ज्यादा फ़र्क नहीं पड़ा
जहा दिल होता था अब वहा दर्द होता हैं.
न मैं गिरा और न मेरे हौसलों के मीनार गिरे। पर, लोग मुझे गिराने में कई बार गिरे...
क्या बताएं लौटकर नौकरी से क्या लाए हैं
घर से जवानी ले गए थे बुढ़ापा लाए हैं !
खुद को अच्छा बना लीजिए,
दुनियां से एक बुरा इंसान कम हो जायेगा....
तानों की भट्ठी में तपा आदमी,
राख नहीं सोना बनता है....
मस्तमौला होकर जीना अपनी ज़िन्दगी,तुम परेशानियों से मत हारना,ज़िम्मेदारी कितनी भी परत चढ़ा दे सिलवटों की,कभी अपने बचपन को मत मारना..!!
समझदारो की भीड़ में खड़ा मुझे वो बावला पसंद है,
हम शौकीन है चाय के, हमे लड़का सावला पसंद हैं..!