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जिंदगी जला ली हमने जैसी जलानी थी, शाहब अब धुएं पे तमाशा कैसा और राख पर बहस कैसी..!

सुनो प्रिय, आप पुष्प नहीं पुस्तकें लाना मेरे लिए !!

मेरा बुरा वक्त क्या आ गया आज अंधों को भी मेरे में कमियां दिखने लगी!!

मुफ्त में मिलती साँसें नहीं , मौत का भी यार दाम चुकाना पड़ता हैं ..

किरदार बह गया पानी में... हम तैरते ही रह गए कहानी में..!!

नज़रों से गुनगुना कर कोई धुन तराशते हैं जो अनजाने चेहरों में खुशियाँ तलाशते हैं अपनों में तो बस जिन्हें ऐब ही दिखते हैं वो गैरों की खातिर बेकीमत बिकते हैं....

'समय दुख काउपचार नहीं करताकेवल उस परपर्दे डाल देता है जितने दिनबीतते जाते हैंउतने पर्देपड़ते जाते हैं' ~ पंकज चतुर्वेदी

आज के जीवन का सीधा सा परिचय है… आंसू वास्तविक और मुस्कान अभिनय है…!!

नाम लेती हो मेरा , बदतमीज ,तुम मुझे आप क्यूं नही कहती ।।

"खोना" हमारे जीवन की एक ख़ौफ़नाक क्रिया है, और मैं क्रिया से बहुत डरता हूँ…!!

सिगरेट के धुंए से भर गया था कमरारात को उसकी तलब जोर की लगी थी…

कुछ ख़याल कुछ हक़ीक़त मिलाते हैं हम, ऐसे ही पंक्तियों में ख़ुद को उतारते हैं हम।

मेरी आँखों में ये जो पानी है, तेरी आँखों की मेहरबानी है।

उठते हुए तूफ़ान का मंज़र नहीं देखा देखो मुझे गर तुम ने समुंदर नहीं देखा

हिचकियाँ आती थी उसे , मेरे याद करने से , शायद अब हिचकियाँ भी , बेवफ़ा हो गई हैं ...!!

हमेशा दूसरों को हँसाओ दुसरो को मनाओ, कभी कभार खुद को भी पूछ लेना चाहिए कि तुम्हारा हाल कैसा है...

दुख उत्पन्न करने वाली चीजों से दूर रहो !

पानी अगर शांत हो तो,गहराई से मज़ाक नहीं करते….

आत्मबल को भेदती इस तीक्ष्ण गर्मी में, मानसूनी बारिश की पहली फुहार हो तुम...

मेरे लिए मंज़िल तुम, और यात्रा, तुम्हारा इंतिज़ार


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