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नहीं पढ़ीं जातीं सम्पूर्ण कविता अब उनसे'दो' पंक्तियाँ दो उन्हें, किताबें वापस ले लो।

बुलंदियों का नशा हमने देख रखा है….बड़ा मुुश्किल है आसमां पे ज़मीर साथ रखना..!

ख़्वाब ख़्वाब ही रह गया , जिंदगी ने कुछ यूं हिसाब किया..!!

हम भी बहुत अजीब है,इतने अजीब है कि बस,खुद को तबाह कर लिया,और मलाल भी नहीं हमें..!!

टूटे हुए लोग,मुस्कुराते बहुत हैं...

कपड़े "सफेद" पहन कर जब तुम मुस्कुराती हो, कुछ देर के लिए "सूरज" को भी लजाती हो..!!

अगर दिशा दिखाने वाला सही हो तो, दीपक का प्रकाश भी सूर्य का कार्य करता है...

काम ऐसा करिये जिसमें कामयाबी के साथ-साथ, सम्मान और सुकून भी मिले।

तुलसी साथी विपति के, विद्या, विनय, विवेक। साहस सुकृति सुसत्य व्रत, राम भरोसे एक।। तुलसीदास जी

बीवी भी हक़ जताती है,माँ भी हक़ जताती है, शादी के बाद आदमी कश्मीर हो जाता है॥

जिन वृक्षों की जड़ें गहरी होती हैं, उन्हें बार-बार सींचने की जरूरत नहीं होती ।

मुझ से झूठ की कोई उम्मीद न करे, मैं आईना हूं सुबह का अखबार नहीं।

ज़िंदगी तू ने मुझे क़ब्र से कम दी है ज़मींपाँव फैलाऊँ तो दीवार में सर लगता है

एक बार अच्छी खासी लड़ाई के बाद तुमने कहा था कि" एक समय बीत जाने के बाद तुम्हें समझ आएगा कि मुझसे अधिक प्रेम तुम्हें कोई ना कर सका और तब तुम मुझे ढूंढोगी, मेरे उस प्रेम को याद करोगी,...

सांवला रंग, मीठी जुबां, थोड़ी सी नशीली हो अच्छा सुनो.... तुम और तुम्हारी चाय दोनों एक जैसी हो.....!!

सिर्फ़ जीना मायने नहीं रखता, सही तरीके से जीना मायने रखता है।

एक दिन जियूंगा अपने लिए भी , ये सोच कर पिता ने सारी उम्र गुज़ार दी ।।

"मर्यादाओं" के सारे द्वार तब शर्मशार हो जाते हैं, जब "दुशासन" जैसे महानीच अस्मत को ढाल बनाते हैं, और वो महिमा थी द्वापर की, जो लाज बची थी "द्रौपदी" की, अब कौरव निर्वस्त्र भी कर दें तब भी "कृष्ण" नहीं आते हैं..!! विरक्ति

झूठे इल्जामों की फ़िक्र कभी मत करना , क्योंकि वक्त का ग्रहण तो चाँद भी झेलता है ...

हृदय से जो दिया जा सकता है वो हाथ से नहीं और मौन से जो कहा जा सकता है वो शब्द से नहीं.!!


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