किसी मंदिर के बाहर लिखा था बेझिझक भीतर चले आइये…." पाप " करके आप थक गए होंगे ?मगर….." माफ़ " करके मैं नहीं थका.।।
सुनो दोस्तों पैसा इतना कमाओ की,
चार लोग तुम्हे अपना दामाद बनाना चाहे...
उदासी तुम पे बीतेगी तो तुम भी जान जाओगे कि
कितना दर्द होता है नज़रअंदाज़ करने से..
बोले हुए अल्फाज़, गुजरा हुआ वक्त,
टूटा हुआ भरोसा, कभी वापस नही आता...
वो सिर्फ़ मेरे थे,
सिर्फ मेरे सामने....
कुछ परेशानियां इतनी बड़ी होती हैं,की उनके चक्कर में जिंदगी छोटी हो जाती है….
ज्ञान का उपयोग न हो तो वह भार के ही समान है.!
~ अज्ञात
ओह अच्छा....
तो तुम कह रहे हो के बारिशों का भी मौसम होता है....
मतलब.....
तुमने देखा नहीं कभी किसी की आंखों को बरसते...!!
वैरागी
सुंदरता का अर्थ नग्नता नहीं,शिक्षा का अर्थ अंग्रेजी नहीं…प्रेम का अर्थ पाना नही…..!!
समझ के बाहर भी
एक दुनियाँ होती है,
जो दुनियाँ की समझ के
बाहर होती है l
सिर्फ नंबर 'डिलीट' करने से यादें मिट पायी है क्या ?
हम दोनों धोखा खा गए हैं..मैंने तुम्हें औरों से अलग समझा, और तुमने मुझे औरों जैसा समझा..!!
तिरी ज़मीं से उठेंगे तो आसमाँ होंगे
हम ऐसे लोग ज़माने में फिर कहाँ होंगे
इब्राहीम अश्क
जिंदगी भी किताब सी होती है.... सब कुछ कह देती है खामोश रह के भी..!!
जिस दिन धरती से छिपकली, कॉकरोच और चूहे खत्म हो जाएंगे,उस दिन धरती पर स्त्रियों का पूर्ण शासन होगा.
रोशनी का एक कतरा भी,
अंधेरे को अपने वजूद का अहसास करा देता है...
कोई व्यक्ति कितना ही ख़ास क्यों न हो,
उसे एक पल में त्यागने कि क्षमता तुम्हारे भीतर अवश्य होनी चाहिए।
ये सोचना ग़लत है के’ तुम पर नज़र नहीं,मसरूफ़ हम बहुत हैं, मगर बे-ख़बर नहीं
हम आपके इशारे पे घर-बार छोड़ दें ?दीवाने हैं ज़रूर ! मगर इस क़दर नहीं !!
~ आलोक श्रीवास्तव
पीड़ा, अवसादों से रिश्ता जोड़कर, नाता खुशियों से तोड़ा था,
मोहब्बत में रूह को फना करके, मैंने अपनी जान निचोड़ा था..
उन्हें याद करें! विक्रम साराभाई, नेहरू, अब्दुल कलाम