सबका दिल जितने में क्या फ़ायदा, मजा तो बस एक के दिल पर कब्जा करने में है..
एक फूल हैं…जो बिना शोर मचाए और भी खूबसूरत तरीके से खिलता हैं…
बुद्धि अगर स्वार्थ से मुक्त हो,
तो हमे उसकी प्रभुता मानने में कोई आपत्ति नहीं।
मेरी अर्जी यही है मेरे बालाकृपा बरसाये रखनामत छोडियो ना मेरा साथदया तुम बनाये रखना
साथ मेरे चलना इतना आसान तो नहीतुझे अभी दुनियां की पहचान तो नहीबेहतर है के छोड़ दो तुम जिद्द करनाजिंदा इश्क के आग मैं जलना ये तुम्हारे मिज़ाज़ मैं नही !!
तुम्हारी गोद में सर रख के मेरा सोना..जैसे मानो एक पागल का ठीक होना..!!
गाँव को छोड़ के हम शहर कमाने आए
अब ये एहसास हुआ जान गँवाने आए!
मोहब्बत जुदाई बर्दाश्त कर सकती है , मगर बेइज्जती नहीं ...
सबने कहा अच्छे से जाना
सिर्फ मां ने कहा बेटा घर जल्दी आना
मेरी जिंदगी मै खुशियां तेरे बहाने से है, आधी तुझे सताने से है आधी तुझे मनाने से है।
क्योंकि नहीं मिलते विचार तुम्हारे हमारे, अलग अलग रास्ते से क्यों ना पहुंचे हम मंज़िल तक
हंसने की आदत डाली है,
खुशी का कुछ एहसास नहीं,
आसू भी अक्सर डुलते है
पर दुःख भी कोई खास नहीं,
नकाबों मैं वक्त गुजरे अपना,
गहरे अपने जज़्बात नहीं...!!
कभी कभी बहुत बुरा लगता है,
नहीं....अपने लिए नहीं.... तुम्हारे लिए...!
मानता हूं मिजाज में सख्ती है मेरे मगर,
मैं इज्जत देने वालों की इज्जत करता हूं.
जिंदगी पर भरोसा कीजिए, भरोसे पर जिंदगी नहीं...
दिलों के ताले की चाबी
लफ्ज़ में नहीं लहजे में होती है !
अंधेरे से नहीं अंधेरे में रखने वालों से बचिए !!!
जब उसकी रूह घायल हुई तो किसी ने नही समझा ,जब वो बुत बन गई तो सब आ गए सुझावों की किताब ले कर।।
गांव मे गुलाम नही मालिक रहते है !
क्रोध सदैव दूसरे को कम
और
स्वयं को ज्यादा हानि पहुंचती है !!!