झूट बोल कर कुछ पाने से अच्छा हैं ,सच बोल कर उसे खो दो …
कुछ सफ़र ज़िंदगी के ऐसे होते हैं जिसमें पैर नहीं दिल थक जाते हैं...
जो अभिमान छोड़ देता है, वही सबसे बड़ा अभिमान होता है !
थक गया हूं मेहमान की तरह घर जाते जाते,
बेघर हो गए हम चंद रुपए कमाते कमाते..!
पुस्तक और प्रकृति से बेहतर दोस्त,इस दुनिया में और कोई नहीं !
मन से उतर रहे हैं,
दिल में रहने वाले...
काश एक शायरी कभी,तुम्हारी कलम से ऐसी भी हो,जो मेरी हो मुझ पर हो और,बस मेरे लिए ही हो..!!
न हम-सफर न किसी हम नशीं से निकलेगा,हमारे पाँव का काँटा है हमीं से निकलेगा !
मैं साँसें तक लुटा सकता हूँ उसके एक इशारे पर
मगर वो मेरे हर वादे को सरकारी समझता है ।
कब कौन समेटता है यहाँ,खुद तोड़ कर पूछते है महफूज तो हो तुम…
तुम्हारा एकांत ही तुम्हें मनुष्य बना सकता है,
भीड़ तुम्हें भेड़ बना देगी।
जया मिश्रा
मुझे मालूम था मेरी मंज़िल "मौत" है,
फिर भी चाह "जीने" की करता रहा,
मुझे नहीं थी परख सही या ग़लत की,
मैं गुस्ताखी पर गुस्ताखी करता रहा,
और जब "जुदा" हुआ उनसे तब मैंने जाना,
सफ़र में तो वो थे "ठोकरें" मैं खाता रहा..!!
जिसकी जेब में पैसा न हो,
उसकी ज़बान में शहद होना चाहिए !
बड़े खुबसूरत दिखते हैं वो,जिनके अंदर ज़हर भरा होता है…
जो जवाब वक्त पर नहीं मिलते,
अक्सर वो अपने मायने खो देते हैं।
हमारे समाज मे, लड़कियों का ध्यान
नहीं रखा जाता, उनपर नज़र रखी जाती है
मैं अपने आप को इतना समेट सकता हूँ,
कहीं भी कब्र बनाओ मैं लेट सकता हूँ…!!
सारे जग की उम्मीदों से
निज स्वार्थ बड़े जब हो जायें
पद हेतु, शत्रु के पाले में
कुछ मित्र खड़े जब हो जायें
तब दिल पर पत्थर रखकर
उनसे हाथ छुड़ाना पड़ता है
निज संबंधों को भूल
पार्थ को शस्त्र उठाना पड़ता है
फंस गया तुम्हारा...
चाहना आसान है,
चाहते रहना कठिन है...
मुझे तोड़कर उसने साबित कियागुरुर दौलत का हो या मोहब्बत का तोड़ा जा सकता है!