इंसान की अक्ल बस इतनी सी है
उसे जानवर कहो तो गुस्सा आता है
शेर कहो तो खुश हो जाता है
वक्त से हारा या जीता नही जाता,केवल सीखा जाता हैं..
योजना के बिना
लक्ष्य सिर्फ इच्छा है
सूरत देखकर नहीं सीरत देखकर हमसफर ढूंढना ,
क्योंकि बुढ़ापे में अच्छे चेहरे नहीं सहारे काम आते हैं...!!
सितमगर हो तुम खूब पहचानते है
तुम्हारी अदाओ को हम जानते है
दगा बाज़ हो तुम सितम ढाने वाले..
घमंड से आदमी फूल सकता है, फल नहीं सकता।
प्रेमचंद
ज्ञान का उपयोग न हो तो वह भार के ही समान है.!
~ अज्ञात
ज़िंदगी शायद इसी का नाम है..दूरियाँ मजबूरियाँ तन्हाइयाँ….!!
मित्रता बड़ा अनमोल रतन
कब उसे तोल सकता है धन?
धरती की तो है क्या बिसात?
आ जाय अगर बैकुंठ हाथ
उसको भी न्योछावर कर दूँ,
कुरूपति के चरणों में धर दूँ।
सिर लिए स्कंध पर चलता हूँ,
उस दिन के लिए मचलता हूँ,
यदि चले वज्र दुर्योधन...
भीगे रहे तेरे ख़्यालों में हम
बारिश तो थम गई
मगर कम्बख़्त ये ख़याल है कि बरसते रहे
चरित्रहीन व्यक्ति दूसरों पर जितना सन्देह करता है, उतना सच्चरित्र नहीं।
महादेवी वर्मा
रात तो सब की एक ही है ,
बस अंधेरा हर किसी का अपना अपना है ..!!
राय पहले से बना ली तू ने
दिल में अब हम तेरे घर क्या करते
इंसान को इंसान की नज़र से तोलिय,
दो शब्द ही सही मगर प्यार से बोलिय।
छोड़ने वाले छोड़ जाते है मुक़ाम कोई भी हो,निभाने वाले निभा जाते है हालात कोई भी हो
बहुत खूबसूरत हैं मेरे ख्यालों की दुनिया
बस तुमसे सुरू और तुम पर खत्म...
हटा पतझर के पहरा, तनिक मधुमास आवे द
उदासल मन का देहरी पर, किरिन सविलास आवे द।
कसक एतना, मसकि जाता करेजा, दर्द अइसन बा
जिये के होसिला लेके, नया उल्लास आवे द।
झुकल आकास देखता, घुटन से जिन्दगी ऊबल
चुकल एहसास, बिनती बा, नया...
चाहा यही की एक ही शक्स समझे मुझे,भीड़ से रहा हमेशा परहेज मुझे
अपने पिता के काम पर कभी मत शर्माना,
वो शर्म खो देते है,
तुम्हारी अच्छी ज़िंदगी बनाने के लिए
हिचकियाँ आती थी उसे ,
मेरे याद करने से ,
शायद अब हिचकियाँ भी ,
बेवफ़ा हो गई हैं ...!!