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World's Best Cow Hospital

गुलामी के दावत से बेहतर हैं, आज़ादी की सुखी रोटी...

जब शिकार का वक्त आएगातब, हम जंगल मे जरूर आएंगे..

सूरज, सितारे, चाँद मेरे साथ में रहें,जब तक तुम्हारे हाथ मेरे हाथ में रहें,शाखों से टूट जाए वो पत्ते नहीं हैं हम,आंधी से कोई कह दे की औकात में रहें !

शुरुआत हो चुकी हैं अब बादशाह के साथ बेगम भी नाचेंगी..!

क्या उस गली में कभी तेरा जाना हुआजहाँ से ज़माने को गुज़रे ज़माना हुआमेरा समय तो वहीं पे है ठहरा हुआबताऊँ तुम्हें क्या मेरे साथ क्या-क्या हुआम्म हम्म, खामोशियाँ एक साज़ हैंतुम धुन कोई लाओ ज़रा….

नही लिखूँगी खत में, अपने तन्हाई के किस्से ,, क्योंकि कुछ शिकायते, गले लगकर की जाती है। सेजल

ये कैसा नशा है मैं किस ख़ुमार में हूँ तू आके जा भी चुका है मैं इंतज़ार में हूँ

हमने जिनके लिए दुआ मांगी,वो गैरों की दुआओं के तलबगार निकले, जिनकी ख़ातिर इक वक्त में खुदा थे हम,अब हम उनकी ही नज़रों में गुनहगार निकले जिन्होंने कभी लाख अच्छाइयां गिनाई थीं मुझमे,अब हम उनकी खातिर महज़ बेकार निकले…!!

अंतर्मन में संघर्ष….फ़िर भी चेहरे पर मुस्कुराहट, यही जीवन का श्रेष्ठ अभिनय है..!!

आज के जीवन का सीधा सा परिचय है… आंसू वास्तविक और मुस्कान अभिनय है…!!

तुम लोगो की बुराई छुपाओकल क़यामत के दिन अल्लाह तुम्हारे गुनाह छुपाएगा,,,

जिंदगी की किताब में….सुकून के पन्ने गायब है!!!

काफ़िर हूँ सर-फिरा हूँ मुझे मार दीजिए मैं सोचने लगा हूँ मुझे मार दीजिए   है एहतिराम-ए-हज़रत-ए-इंसान मेरा दीन बे-दीन हो गया हूँ मुझे मार दीजिए   मैं पूछने लगा हूँ सबब अपने क़त्ल का मैं हद से बढ़ गया हूँ मुझे मार दीजिए   करता हूँ अहल-ए-जुब्बा-ओ-दस्तार से...

घर बटा बर्तन बटे सारी ज़मीनें बाँट लीं बाप के मरते ही बच्चों ने पतंगें छाँट लीं इक तरीक़ा ये भी था फल बाँटते वो उम्र-भर भाइयों ने पेड़ काटा और लकड़ी बाँट लीं

बारिश के मौसम में सन्नाटे में, एकांत का असली सुख पता चलता है, हम जिस रस में होते हैं उसी में डूब जाते हैं, इसमें भी हल्की ध्वनि में संगीत सुनते हुए मदिरापान का आनंद शेष सभी प्रकार के सुखों...

थोडी आज़ादी थोडी पाबंदी थोडा वक़्त थोडी चाहत थोडे बादल थोडी बारिश थोडी नादानी थोडी समझदारी थोडा तुम थोडी मैं बस और क्या चाहिए ?? मिलकर पूरा हम हो जायेंगे ना थोडा बचेंगे ना पूरा दोनों मिलकर आकाश भर में समाएंगे फिर ख़्वाब सारे हकीक़त...

आज से लक्ष्य पर धयान दूंगा दिशा खुद मिल जाएगी

भूल गए है कुछ लोग हमे इस तरह.. यकीन मानो यकीन ही नही आता !

घाव के साथ युद्ध लड़ना पड़ेगा,मरने तक तो जिंदा रहना पड़ेगा…

जिन्दगी कुछ ऐसी मोड़ पे आकर रुक सी चुकी है,की मजबूरी जीने की हो गई है और चाहत मारने की !


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