विनय विफल हो जहाँ, बाण लेना पड़ता है।
स्वेच्छा से जो न्याय नहीं देता है, उसको
एक रोज आखिर सब-कुछ देना पड़ता है।
फकीरों की सोहबत में बैठा कीजिए साहब!!
बादशाही का अंदाज खुद ब खुद आ जाएगा...
अब कोई आए चला जाए मैं ख़ुश रहता हूँ
अब किसी शख़्स की आदत नहीं होती मुझ को
अपने बच्चों को कुछ दें या चाहें न दें ,
उच्च शिक्षा अच्छे संस्कार अवश्य दें..!!
इस भरी गर्मी में कुछ तो सुकून आ जाये..!या तो तू आ जाये या मानसून आ जाये..!!
एक शराब की बोतल दबोच रखी है,
तुजे भुलाने की तरकीब सोच रखी है...
क्या फायदा इतनी बड़ी दुनिया का
जब कोई घुमाने नही ले जा रहा है...
रिश्ते उन्ही से रखो जो समय आने पर ,
सहयोग और प्यार दिखाए' औकात नही ...
मसला सुकून का है,
जिंदगी काट तो हर कोई रहा है !
स्वर्ग के सम्राट को खबर कर दो,
रोज ही आकाश चढ़ते आ रहे हैं हम..
बहुत तकलीफ देते है वो जख्म,
जो बिना कसूर के मिलते है।
आदमी मुर्दे को पूजता है,अस्थियां पूजी जाती हैं।राख पूजी जाती है।लाशें पूजी जाती है।तिरस्कार होता है।और जीवंत का आदमी अद्भुत है।
आईने बेचता था कोई पूछता ना था ,जबसे मुखौटे रख लिए धंधा चमक गया ।।
महादेव के दरबार में सबकी समस्याओं का हल है,
कीमत केवल सच्ची आस्था और एक लोटा जल है..!!
मुफ़्त में नहीं सीखा ,उदासी में मुस्कराने का हुनर..!बदले में ज़िन्दगी की ,हर ख़ुशी तबाह की है..!!
हवस की भूख एक ऐसी भूख है जो पेट भरने,
और दिमाग़ ख़ाली होने के बाद लगती है..!!
अनवर चतुर्वेदी
लिबास की कमी गरीब के तन पर अजीब लगती है,मगर अमीर बाप की अर्धनग्न बेटियां तो शरीफ लगती है...
बहुत संभाल के हमनें रखे थे पाँव मगर ,
जहा थे जख़्म वही चोट बार - बार लगी ।।
पसंद आईं कुछ भी चीज़ें,ज़्यादा देर तक ठहरती नहीं हैं…
होशियारी नोच लेगी सारे ख्वाब,लुत्फ जो भी है नादानी में है...
बिलकुल! चलिए जारी रखें। जहां निर्मलता की किरण हर कदम दिखाए।
दुनिया जो कठिनाईयों से भरी हो सकती है, हम निर्मलता को पकड़ेंगे, एकमात्र अद्भुत वस्त्र।
चमकती हुई आँखों के साथ हम...