" वेदनाएं " कभी मृत्यु का रास्ता दिखाती है,,
तो कभी "लेखक" के जन्म का।
बेईमानी से कमाया हुआ पैसा ,
बीमारी में चला जाता है.....!!
मुस्कान को तमीज चाहिएआंसुओ को तन्हाई
अकेला पन जब काटने लगा
तो बचपन की याद आई
भीड़ बहुत है आसपास सबके
पकड़े है कोई न कोई हाथ भी
दिल ने जब सुकून चाहा
याद मां की गोद ही आई
हां खुश हूं में कहता है हर कोई
हंसी...
रिश्ते तोड़ देने से मोहब्बत खत्म नहीं होती….दिल में वो भी रहते हैं जो दुनिया छोड़ देते हैं..!
ज़ुबान और दिमाग़ तेज चलाने से ,रिश्तों की रफ़्तार धीमी पड़ जाती है …
जिसके भी भाव बढ़े उसे त्याग दो,
चाहे "बाबु" हो या "टमाटर.🍅
काम ऐसा करिये जिसमें कामयाबी के साथ-साथ,
सम्मान और सुकून भी मिले।
नफरत का बाज़ार ना बन, फूल खिला तलवार ना बन,रिश्ता रिश्ता लिख मंज़िल, रस्ता बन दीवार ना बन- राहत इंदौरी
उसूलों पर चलती हूँ , बेवजह कुछ ना कहती
कोई बेवजह कहेगा तो चुप भी नहीं रहती।
हंसने की आदत डाली है,
खुशी का कुछ एहसास नहीं,
आसू भी अक्सर डुलते है
पर दुःख भी कोई खास नहीं,
नकाबों मैं वक्त गुजरे अपना,
गहरे अपने जज़्बात नहीं...!!
✯||कहा जाऊं मेरी सादगी को लेकरयहां हर कोई सूरत का दीवाना है…||✯
सारे जग की उम्मीदों से
निज स्वार्थ बड़े जब हो जायें
पद हेतु, शत्रु के पाले में
कुछ मित्र खड़े जब हो जायें
तब दिल पर पत्थर रखकर
उनसे हाथ छुड़ाना पड़ता है
निज संबंधों को भूल
पार्थ को शस्त्र उठाना पड़ता है
फंस गया तुम्हारा...
वो आईने में कैसे बर्दाश्त करता होगा खुद को
उसे तो धोकेबाज़ लोगो से सख्त नफरत थी..।।
अगर जो चाहा है वो नही मिला..तो एक बार जो मिला है उसे चाह कर देखो..!!
जितने ख़राब हालातो से आप लड़ेंगे ,
कामयाबी उतनी ही बड़ी होगी....
मुझे प्रेम तुझसे है तो है..!अब क्या मुकद्दमा करोगी मुझ पर…!!🍹
दो नावों पर सवार था‚
उसकी ज़िन्दगी का सफ़र;
मैंने ख़ुद की ...
मैं राम बनूंगा तुम मेरी मर्यादा बनना..मैं कृष्ण बनूंगा तुम मेरी राधा बनना..
उन्होंने कहा चाय में चीनी कितना डालू,मैंने बोला बस आपने छु लिया चाय मिठी हो गयी।
रंग बदलती इस दुनिया में...
मुझे अपने बेरंग होने से...शिकायत न रही....