मेरा दर्द भी इन मोतियों की तरह बिखरा पड़ा रहता हैं, धागे में पिरोने की कोशिश करूं तो धागे भी टूटने लगते हैं
खयालों के रिश्तें क्या जानें
रूह से जुड़े रिश्ते क्या होते हैं..!!
जमीं पे एक ही औरत दिखाई देती है ,
मुझें तो माँ की मोहब्बत दिखाई देती है ।।
सकारात्मक विचार कड़वे जरूर होते हैं मगर इनका परिणाम हमेशा सुखद होता है।
ज़ेहन ने मुझे कहा था पर हमनें दिल नहीं बदला
तुम ही दूर होते गए, हमनें मंज़िल नहीं बदला
तुम्हारा ये भ्रम झूठा है कि आंखों में कोई ओर है
चीर के देखो दिल मेरी सांसों में तुम्हारा ही शोर है
वह पथ क्यापथिक कुशलता क्याजिस पथ पर बिखरे शूल न होंनाविक की धैर्य परीक्षा क्याजब धाराएँ प्रतिकूल न हों
~ जयशंकर प्रसाद
तुम्हारी आँखों ने बसाएं रखा है शहर कोई,कोई तन्हा हो सकता है, कानपुर से खफ़ा नहीं,
विरानी खुद में थी,बेरंग दुनियां को लिखते रहे…
मैं राम बनूंगा तुम मेरी मर्यादा बनना..मैं कृष्ण बनूंगा तुम मेरी राधा बनना..
मोहब्बत क्या है,हाथों में चूड़ामांग में सिंदूरगले मे मंगलसूत्रऔरमहबूब की वफादारी।
ज़ख़्म झेले दाग़ भी खाए बहुत
दिल लगा कर हम तो पछताए बहुत...!!
ऐसे ही नहीं बन जाते गैरों से रिश्ते,कुछ खालीपन अपनों ने ही दिया होगा।
~गुलज़ार
कोई दुःख
मनुष्य के साहस से बड़ा नहीं,
हारा वही जो लड़ा नहीं।
कुँवर नारायण
एक सांस सबके हिस्से से हार पल घट जाती है..कोई जी लेता है जिंदगी ,किसी की कट जाती है..!!
मुझमें बसने वाले शख्स ने,❣️✨❣️मुझमें रहना छोड़ दिया..!!!
जमीन पर कही तो कोई ऐसी जगह होगी जहा हम मिलेगे.
कागज़ में दब के मर गए कीड़े किताब के
दीवानी बिना पढ़े लिखे मशहूर हो गयी....!!!
चरित्र कि कसौटी पर स्त्री के जज़्बात निचोड़े जाते हैं,पवित्रता कि परीक्षा में हर बार उसके कपड़े उतारे जाते हैं,हर पीड़ा सहकर भी खामोश रहती है वो,उसके ज़ख़्म तो भर जाते हैं मगर निशां छोड़े जाते हैं..!!
" ऐब " भी बहुत है मुझमे , और " खूबियां " भी ,
ढूँढने वाले तू सोंच , तुझे क्या चाहिये मुझमे ..!!