जब तक मनचाहा परिणाम ना मिले , प्रयास करना ना छोड़ें, क्योंकि सब्र करना अफ़सोस करने से बेहतर है ...
बुरा वक्त रुलाता है,मगर बहुत कुछ सीखा कर जाता है !
सब लोग कहते हैं ..... " सीता और द्रौपदी के कारण हुई रामायण और महाभारत, किसी ने यह नहीं कहा नारी का सम्मान न करने अंत है रामायण और महाभारत " !!
क्यूं सोचें, के चार लोग क्या कहेंगे?
समाज में महज़ चार लोग थोड़ी है।
दूसरो को नहीं...
खुद को समझना "चुनौती" है...!!
नाम लेती हो मेरा , बदतमीज ,तुम मुझे आप क्यूं नही कहती ।।
परिंदों को नहीं पता उनका मजहब क्या है,
वरना आसमां भी खून से नहा गया होता..!!
अब भी पूरा भरा है मेरे भीतर
तेरे जाने के बाद का ‘ख़ालीपन’
खामोश रहना हमें वहीं सिखाते है
जिनसे हम बात करना चाहते हैं ..!!
थोड़ा डुबूंगा, मगर मैं फिर तैर आऊंगा ,
ऐ ज़िंदगी,
तू देख, मैं फिर जीत जाऊंगा...
मैं कैसे कह दूँ आज मेरे मन में व्यथा नहीं,
पर संघर्षों से घबरा जाना मेरे कुल की प्रथा नहीं..!
आपकी अकड़ अभी जवा हुई हैं कल परसों में ,हमारे तेवर बगावती है वर्षो से…
आज खुद को खुश रखना ही
दुनिया का सबसे बड़ा संघर्ष बन गया है।।
अकेले चलना सीखो क्योकि सहारा कितना भी सच्चा हो, एक दिन औकात दिखा ही देता है...
अगरबत्ती की तरह तुम्हें खुशबू ही देंगे,
तुम शौक से चाहे जितना भी जला लो हमे।
जिंदगी भर डर डर के रिश्तों को,
निभाने से बेहतर है अलग हो जाना...
जान गया वो हमें दर्द में भी मुस्कुराने की आदत है,इसलिए वो रोज़ नया दुःख देता है मेरी ख़ुशी के लिए।
पुरुष सफ़ल रहे जीवन में या असफल रहे... वो हर परिस्थिति में एक छली गई स्त्री या टूटी हुई स्त्री के जीवन को बदल सकता है उन्हें सकारात्मक कर सकता है और सहायता करने को तत्पर रहता है, परंतु स्त्री...
लहू किस कद्र लबों से फूटा हैसाँस टूटी है कि तेरा साथ छूटा है
शिकवा नहीं बनता अब रहजनों सेरहबरों ने ही काफिला लूटा है
लोग ओर भी शामिल थें मेरी हयात मेंदिल मगर तेरी जुस्तजू में टूटा है
चिराग जल रहें हैं...
मैं लेखक हूं, हालातों पर लिखता हूं, जज्बातों पर लिखता हूं,दफन हुई ख्वाहिशें, किसी की चंद मुलाकातों पर लिखता हूं,समाज में फैल रहे द्वेष, अनैतिकता और गंदगी पर लिखता हूं,कभी कभी मुकद्दर से चोट खायी अपनी ज़िन्दगी पर लिखता हूं..!!