पढ़ तो लेते है सब मुझे अच्छे से
बस समझते है अपने नज़रिए से..!
मयस्सर इन आंखों में डूबना होता,
मैं ताउम्र कभी तैरना ना सीखता..!!
विरक्ति
हर शायरी किसी ना किसी के लिये एक गुमनाम खत है..!
जो किसी के घर के पते पर नही मन की,दहलीज पर खुलती है।
जीभ कभी फिसलती नहीं है,
जो दिमाग़ में चल रहा है,
वो जीभ पर आ जाता है !!!
इस दुनिया मे कुछ भी स्थायी नही है
यहाँ तक कि हमारी परेशानियाँ भी नहीं!
शीशे टूटने के बाद कहाँ जुड़ पाते हैं जो जुड़ भी जाए तो एक ही अक्स हज़ार नजर आते हैं।
"नजरों का खेल था साहब"
"वो चुरा ना सके हम हटा ना सके"
फर्क बहुत है तेरी मेरी समझ में,..तूने जज़्बातों से सीखा है और मैने हालातों से..!!
नहीं पढ़ीं जातीं सम्पूर्ण कविता अब उनसे
'दो' पंक्तियाँ दो उन्हें, किताबें वापस ले लो।
तुम कुछ इस तरह से हार जाना, की वो जीत करके भी पछताए...
बदला नहीं लूँगा, बस बदल जाऊँगा.
किसिको गिराऊँगा नहीं, बस संभल जाऊँगा !
क्या लिखूं ऐसा जो पढ़कर वो रोए भी ना
और रात भर सोए भी ना..!!
बलात्कार को 'पाशविक' कहा जाता है , पर यह पशु की तौहीन है, पशु बलात्कार नहीं करते। सुअर तक नहीं करता, मगर आदमी करता है।
हरिशंकर परसाई
बेशक उठाओ उंगली मेरे किरदार परमगर शर्त ये है कि उंगली बेदाग होनी चाहिए
मैं कितना भी गैर जरूरी हो जाऊं तुम्हारे लिए मेरे आंसुओ का बोझ कम ना होगा, और रह लो तुम कितना भी मेरे बिना खुश, मेरी सिसकियों का कर्ज़ तुम्हारे ज़िन्दगी से कम ना होगा...!!
पद बड़ा होने से विचार बड़े नहीं होते‚ लेकिन
विचार बड़े होने से पद जरूर बड़ा हो जाता है।
अमीर चतुर्वेदी
अक्सर, पिताओं के गुज़र जाने के बाद ही
हम उनसे प्यार करना सुरु करते हैं.
सत्य की रक्षा हर धर्म का आधार है !
"पड़ते जिस ओर चरण मेरे
भूगोल उधर दब जाता है।"
दिनकर जी
एक अदा से शुरू एक अन्दाज़ पर खत्म होती है ,नजर से शुरु हुई मोहब्बत नजरअंदाज पर खत्म होती है !!