प्यार हो या परिंदा, दोनों को आज़ाद छोड़ दो... अगर लौट आया तो तुम्हारा और अगर न लौटा तो वह तुम्हारा था ही नहीं कभी...
दुनिया को आग लगाने की कोई जरुरत नहीं
तुम मेरे साथ चलो दुनिया तो वैसे ही जल जायेगी
पत्थर में भगवान है, लेकिन इंसान में इंसान नहीं !
जिस स्त्री को पूजते रहे कभी दुर्गा कभी काली में,
आज उसकी अस्मत सरेआम नीलाम की है पांचाली में..!!
न मैं शायर हूँ न मेरा कोई शायरी से वास्ता ,
बस एक आदत सी हो गई उसकी यादों को बयान करना ..!!
ज़िंदगी जोड़ घटाव से नहीं, प्रेम और लगाव से है।
मेरा रूठना
तेरा मनाना मुझे
मेरा कहना
तेरा सुनना मुझे
मेरा समझाना
तेरा समझना मुझे
मेरा बेपरवाह होना
और तेरा जिम्मेदार
कहना मुझे
हाए...वो भी क्या
खुश़-फैमियां थी मेरी ।।
तकदीरो में नही था मेरे वो शख्सजो मेरे हाथो से अपने हाथो की लकीरें मिलता था
नैतिकता, समानता तथा न्याय के सिद्धांत कैलेंडर के साथ नहीं बदलते।
बिजली विभाग तो यूंही बदनाम है
काटना तो कोई तुमसे सीखे...
जब मोहब्बत जवान होती है
तो हर अदा एक ज़बान होती है
जीवन में किसी को परखने का नहीं ,समझने का प्रयास करिए …
दूसरों की आंखों में आंसू लाने वाले ये क्यों भूल जाते हैंकि भगवान ने दो आंखें उन्हें भी दी हैं और कर्म समय चक्र के साथ घूमकर एक दिन हमारे समक्ष अवश्य आते हैं।
मोहब्बत मार देती है लिखा था एक पन्ने पर,सुना है लिखने वाला भी मरा था इश्क कर के..!!
मैं तुम्हरे साथ हूं कहने में और,रहने में बहुत फर्क होता है….
एक ही चाहिए लेकिन परमानेंट चाहिए,
जिसे परेशान भी में करूं और प्यार भी करूं…!!
काश जिंदगी भी माँ की तरह होतीदो आँसू देखकर सजा़एं माफ़ मर देती !!
मैं कितनी भी कोशिश कर लूअपनी शायरी में प्यार के रंग नहीं उड़ेल पाती
मेरेशब्दोंमें अक्सर जिक्र होता है
रुसवाई, बेवफाई,बेरुखी,बेचैनी,आँसूक्योंकि आज तकमुझे तुमसे यही सब मिला हैइश्क क्या होता है?कभी जान ही नहीं पाईजो तुमसे आजतक नही मिलाशायद वही इश्क था
डूबने ही वाला था उसकी झील सी आंखों में,मगर वहां पहले से कई मगरमच्छ बैठे थे ...
विज्ञान का विद्यार्थी रहा हूँ इसलिए बता रहा हूँकि भूत जैसी कोई चीज नहीं होती…पर चुड़ैलें सच में होती हैं भाई.!!