ज़रा अपना लहज़ा संभालो,
बातें नस्लो का पता देती हैं...
ख्वाहिशों ने जब भी कोशिश की उड़ने की,
परिस्थितियों ने "पैरों" में बेड़ियां डाल दिया..!!
विरक्ति
फिक्र से चेहरे कि चमक मिटा लेती है,गंदी नियत लबों से उसके मुस्कान हटा लेती है,
पीड़ा भी झलकती है उसकी आंखों में,लेकिन खुद को वो निःशब्द बना लेती है,
और अपनी औकात से ज्यादा सहती है वो,अपमानित हो चरित्र तो खुद...
चेहरे अजनबी हो जाये तो कोई बात नही !रवैये अजनबी हो जाये तो बडा दर्द होता है
जितना बड़ा संघर्ष होगा, जीत उतनी ही शानदार होगी।
स्वामी विवेकानंद
शादी विवाह में जिनको ग़रीब समझकर बुलाया नहीं जाता है,
वही लोग अक़्सर अंतिम यात्रा में सबसे पहले पहुंचते हैं।
मैं ढूंढता हूं खुद में ही खुद कोमैं शायद वो नहीं जो हुआ करता था !
मैं तुम्हरे साथ हूं कहने में और,रहने में बहुत फर्क होता है….
कैसा रहेगा आपके शहर में ,,मुखौटे का दुकान खोलूं अगर.?
“ये फ़र्ज़ रहे ध्यान में,लिखा है संविधान में,अगर कोई भी बात,तेरा मन गई कचोट कर,तू वोट कर,ये प्रश्न तेरे बल का है,सवाल तेरे कल का है,समय ये फ़ैसले का फिर से,आ गया है लौट कर,तू वोट कर”
पैसा मानव इतिहास की सबसे खराब खोज हैं,
लेकीन मनुष्य के चरित्र को परखने की
सबसे विश्वशनीय सामग्री हैं।
कुछ रहम कर ऐ जिन्दगी थोड़ा सवर जाने दे ,तेरा अगला जख्म भी सह लेंगे पहले वाला तो भर जाने दे..!
आवारा
बस इतना सा ही ख़्वाब पूरा चाहिए…हर सुबह तू मुझे मेरे साथ चाहिए…!!
अब आग माचिस से नहींलोगों की बातों से लगती है…!!
तुम्हारी नामर्दानगी बुजदिली,
एक दिन इस देश की तबाही का कारण बनेगी।
इश्क है अगर तो शिकायत न कीजिए... और शिकवे हैं तो मोहब्बत ना कीजिए..!!
बदलती दुनिया में अजीब सा फसाना आया है,
किरदार का दौर गया दौलत का ज़माना आया है।
होशियारी नोच लेगी सारे ख्वाब,लुत्फ जो भी है नादानी में है...
बिलकुल! चलिए जारी रखें। जहां निर्मलता की किरण हर कदम दिखाए।
दुनिया जो कठिनाईयों से भरी हो सकती है, हम निर्मलता को पकड़ेंगे, एकमात्र अद्भुत वस्त्र।
चमकती हुई आँखों के साथ हम...
कभी-कभी हमें उन लोगों से शिक्षा मिलती है,
जिन्हें हम अभिमान वश अज्ञानी समझते हैं।
फर्क करना ज़रा मुश्किल लगा था,जब चेहरे अपनों के गैरों से ही मिलने लगे थे…!