जब क्रूर समाज ममता को नारी की कमजोरी समझ बैठे,
तब उस ममता को शक्ति का नव रूप बनाना जरूरी है।
माँ बाप का सहारा ऐसे बनो, जैसे बचपन में वो तुम्हारा सहारा थे...
हजारों कमियां होगीं मुझे में पर
औरों सा डबल रोल में तो नहीं हूं ना...!!
दुःख देखिएहम सब अकेले हैंफिर भी हमारे पास समय नहीं हैकिसी अकेले के लिए।
जलने वाले जलते रहो जलना तुम्हारा काम है,हम भी तुम्हे बुझने नहीं देंगे,क्योंकि यह हमारा काम है !
ज़िन्दगी ने दिए हैं बहुत से धोखे,
बट कोई बात नहीं...इट्स ओके.
बिन मेहनत तरक्की चाहकर, रूपयों से खुशियां छांट लेते हैं,
स्वाभिमान बेचकर अपना, वो किसी के भी तलवे चाट लेते हैं..
रोज़ अच्छे नही लगते आँसू खास मौको पे मज़ा देते है..!!
हाय वो जिम्हें देखा भी नही याद आये तो रुला देते है..!!
आग अपने ही लगाते हैगैर तो सिर्फ हवा देते है…!!
आगे सिर्फ अंधेरा है,इसलिए इस बार अपना वोट सोच समझ कर दें !
शब्द सरिता बहती रहे, कलम अनवरत चलती रहे, बस यही आशीर्वाद मिलता रहे ! !
ईश्वर को आखिरी उम्मीद नहीं,
पहला भरोसा बनाइए...
किसानों के लिए MSP की लड़ाई
युवाओं के लिए रोज़गार की लड़ाई
वंचितों के लिए हिस्सेदारी की लड़ाई
जन-जन के लिए लोकतंत्र की लड़ाई
आसमान जितना नीला है,
सुराजमुखी जितना पिला है,
पानी जितना गिला है,
लगता है स्क्रू उतना ही ढीला है. . .
खामोशी से मतलब नहीं, मतलब तो बातों का हैदिन तो गुजर जाता है, मसला तो रातों का हैं!!
किसी ने कहा तुम बहुत अच्छे हो
मैंने कहा यही तो बस खराबी है..
यूँ भी हयात में है, जवानी की अहमियत
जैसे शदीद प्यास में पानी की अहमियत
रफ़्तार में रहें न रहें और बात है
लेकिन है ज़िंदगी में रवानी की अहमियत
लोगों ने सिर्फ़ सुन के, बजा दी हैं तालियाँ
किरदार को पता है कहानी...
रंगों में रंगों को मिलने तो दो
फूलों से दिल को खिलाने तो दो
आई है फिर से रंग भरी होली
है ये रंग गौरी नहीं बन्दूक की गोली
तो आओ रे.....
खेलों तुम सब होली रे
भर लो ये तुम आज प्रेम रंग...
मज़लूम होते हुए फ़तेह हासिल करना, यह मैंने इमाम हुसैन से सीखा
महात्मा गांधी
दर्द का कहर बस इतना सा है,कि आँखें बोलने लगी और आवाज रूठ गई ..
मिलो कभी फुर्सत निकाल कर, एक दिन बहुत उलझना है मुझे तुम से !