ठहरी हुई ख़्वाहिशों की बंद किताब हूँ मैं..ज्यादा तो नहीं मगर खुद में ही, बेहिसाब हूँ मैं..!!
अगर हमे छोड़कर वो खुश है,
तो शिकायत कैसी,
अब हम उन्हें खुशी भी न दे,
तो महोब्बत कैसी...
जीवन के युद्ध में बस अपने आप मत हारिये
कोई दूसरा आपको कभी नहीं हरा सकता।।
उम्मीद हाथ पकड़ने की है,और लोग हैं कि कमज़ोर नस पकड़ते हैं।
कोई व्यक्ति कितना ही ख़ास क्यों न हो,
उसे एक पल में त्यागने कि क्षमता तुम्हारे भीतर अवश्य होनी चाहिए।
कभी किसी को हैसियत से मत तोलो,
एक रुपए की मोमबत्ती भी खुद
मिटकर किसी घर को रोशन कर जाती है।
मर्द के शब्द झूठे हो सकते हैं, आँसू नहीं।
लकीरों की इस भीड़ मेंकाश होती एक लकीर तेरे नाम कीबस वही बना लेते अपना घरऔर बंद कर लेते अपनी सारी ख़ुशियाँहमेशा के लिए अपनी मुट्ठी में
एक शख़्स सुकून जैसा,जो कभी मिला ही नहीं।
भरता नही ज़ख्म अगर नासूर बन जाये ॥
जिसे अपना समझो वही जब दूर हो जाये ॥
सब कुछ तमाशा हैं,
जब तक कि वो दूसरे के साथ हो रहा हैं
ज़िंदगी किसी के तो काम आये, हमारी उमर ही आपको लग जाये !!
हजारों किताबों को पढ़ो तुम्हारे शब्द नदी की तरह बहेंगे
हिंसा और अज्ञानता के
मकड़जाल को शिक्षा
की छड़ी से
साफ़ किया जा सकता है।
कैलाश सत्यार्थी
अपनी बेटी को ज्ञान देकर अच्छे और बुरे का,
उसे इस गंदे समाज का आईना दिखाता है,
एक पिता ही है जो मजबूती से हांथ पकड़कर,
उसे कदम से कदम मिलाकर चलना सिखाता है..
यादों से न पूछें तरबियत उनकीये वो आजाद परिंदे हैं जो पल में सागर पार कर लेते हैं
संघर्ष में तुम अनाथ हो मित्र,
क़ाफ़िला तो सफलता के बाद उमड़ता है!!
पढ़ाई चल रही है ज़िंदगी कीअभी उतरा नहीं है बस्ता हमारा !!
भूल गए है कुछ लोग हमे इस तरह..
यकीन मानो यकीन ही नही आता !
पलकों से रास्ते के कांटे हटा देंगेफूल तो क्या हम अपना दिल बिछा देंगेटूटने न देंगे हम इस प्यार को कभीबदले में हम खुद को मिटा देंगे 🌶