बना कर मिट्टी के दिए जरा सी आस पाली है ,
मेरी मेहनत भी ख़रीदो लोगो मेरे घर भी दिवाली है ...
कोई तो बहाना बनाओइक मुलाकात का_!!
एक आँसू भी हुकूमत के लिए ख़तरा है
तुम ने देखा नहीं आँखों का समुंदर होना ।
मुनव्वर राना
उदासियों के लिए तो एकांत ही चाहिएँ
ख़ाली छतों पे चांद तारों का सिलसिला रखना..!!
कभी कभी दिल यूं भारी होता,
जैसे सीने पे पहाड़ रख दिया हो किसी ने
“संगीत”
लगाता है मन की पीड़ाओं परमरहम सुकून का
लड़ाई का उद्देश्य जीत होता है। संरक्षण में कोई संभव जीत नहीं होती।
सच की तपस्या से बेहतर है, झूठ से सन्यास ले लिया जाए.
याद रखना, ढलते वक्त में हाथ छोड़ा है,
हिसाब तो जरूर किया जाएगा ।
ये ज़िन्दगी इतनी भी आसान नहीं, जितनी हम समझ रहे थे,
इश्क़, समझौते और जिम्मेदारियों के तजुर्बे रोज़ मिल रहे थे..!!
मोहब्बत मेरी आख़री शरारत थीफिर यूं हुआ के मैं बचपन से निकल आया….!
मैंनेगुलाब कीमौन शोभा को देखा !उससे विनती कीतुम अपनीअनिमेष सुषमा कोशुभ्र गहराइयों का रहस्यमेरे मन की आंखों मेंखोलो !मैं अवाक् रह गया !वह सजीव प्रेम था !मैंने सूंघा,वह उन्मुक्त प्रेम था !मेरा हृदयअसीम माधुर्य से भर गया !
प्यार नहीं था वो
था वो बस एक दिखावा,
छला दिल को उसने ऐसे
दिया दर्द मुझे ज़िंदगी भर का !!
हमें कई पराजयों का सामना करना पड़ सकता है,
पर हमें पराजित नहीं होना चाहिए।
बढ़ती हुई समझ,जीवन को मौन की ओर ले जाती है.!
हर वक़्त नया चेहरा... हर वक़्त नया वजूद,
इस शख़्स ने आईने को, हैरत में डाल दिया….
तन को सौ बंदिशें , मन को लगी न रोक तन की दो गज कोठरी , मन के तीनों लोक !!
ज़माना बड़े शौक़ से सुन रहा था ,
हमीं सो गए दास्ताँ कहते कहते ..!!
तबियत की बात है जनाब , वर्ना जबाब ऐसे दूं कि सवाल ही पैदा ना हो ।।
जबरदस्ती की नजदीकी से,
सुकून की दूरियां अच्छी हैं....