खुद में झांकने के लिए जिगर चाहिएदूसरों की बुराई करने में हर शख्स माहिर होता है!
कभी कभी लगता है जिनको मोहब्बत में ज्यादा तमन्ना नहीं होती है न.. उनके ही ज्यादा गहरे ज़ख्म होते हैं
सागर की अपनी क्षमता है
पर माँझी भी कब थकता है
जब तक साँसों में स्पन्दन है
उसका हाथ नहीं रुकता है
मन्दिर तक पहुंचना तन का विषय है,
लेकिन शिव तक पहुंचना मन का विषय है …
जिंदा रहने के लिए भोजन जरुरी है। भोजन से भी ज्यादा पानी जरुरी है, पानी से भी ज्यादा वायु जरूरी है और वायु से भी ज्यादा आयु जरूरी है, मगर मरने के लिए कुछ भी जरुरी नहीं है। आदमी यूं...
कैसा रहेगा आपके शहर में ,,मुखौटे का दुकान खोलूं अगर.?
कोई ये कैसे बताए कि वो तन्हा क्यूँ हैवो जो अपना था वही और किसी का क्यूँ हैयही दुनिया है तो फिर ऐसी ये दुनिया क्यूँ हैयही होता है तो आख़िर यही होता क्यूँ है
-कैफ़ी आज़मी
नहीं पढ़ीं जातीं सम्पूर्ण कविता अब उनसे
'दो' पंक्तियाँ दो उन्हें, किताबें वापस ले लो।
ख़ुद को ले आए है इस मक़ाम पर हम,अब दिल को कुछ भी बुरा नहीं लगता.
ऐसा नहीं के हम बुरे हैं बोहत
इक प्यारी सी नज़र, की है बस कमी
मैं सागर से भी गहरा हूॅं
तुम कितने कंकड़ फेंकोगे।
इश्क़ और सुबह की चाय
दोनों एक समान होती हैं,
हर बार वही नयापन,
हर बार वही ताज़गी...
काश ..!! तुम वो होते जो मैने सोचा था
पर तुम तो वही थे जो दुनिया ने बोला था..!!
वक़्त से लड़ने के लिए
अपने आप का होना ज़रूरी है
लोग बातें बनाएंगे
दिलासा देंगे और हंसी भी उड़ाएंगे।
नेहा यादव
मैं वो दरिया हूँ की हर बूंद भँवर है जिसकी,तुमने अच्छा ही किया मुझसे किनारा करके।
हम खाली किताब थे...
लोग आते गए सबक छपता गया..!!
अपनी हालत का ख़ुद एहसास नहीं मुझ को,,
मैंने औरों से सुना है के परेशान हूँ मैं...!!
सोचो तो सारी उमर मुहब्बत में कट गई,देखो तो एक शक्स भी मेरा नहीं हुआ ।।
वह नास्तिक है, जो अपने आप में विश्वास नहीं रखता।
स्वामी विवेकानंद
ठहरी हुई ख़्वाहिशों की बंद किताब हूँ मैं..ज्यादा तो नहीं मगर खुद में ही, बेहिसाब हूँ मैं..!!