खुद को शरीफ बस इतना ही रखो, जितना आपके साथ दुनिया रहे !
मुझे मालुम नही, ईद कैसे मनाया जाय,मैं गैर मुस्लिम हूं, बधाई कबुल करना ...
न मैं शायर हूँ न मेरा कोई शायरी से वास्ता ,
बस एक आदत सी हो गई उसकी यादों को बयान करना ..!!
भेदभाव देखें तो चुप न रहें।
चुप रहना बढ़ावा देना है।
इत्र,परफ्यूम से सिर्फ़, लिबास मेहकता है, क़िरदार नहीं।
रहने को सदा दहर में आता नहीं कोईतुम जैसे गए ऐसे भी जाता नहीं कोई
~ कैफ़ी आजमी
सारी उम्र एक ही गलती हमने बार बार दोहराई
अन्धों को आँसू दिखलाये बहरों को आवाज़ लगाई
जिसके करीब बहुत लोग हों, उनसे दूर रहना ही बेहतर है....
लगेगी आग तो आएंगे घर कई जद में,
यहां पे सिर्फ हमारा मकान थोड़ी है'
अंगुलियां यूं न सब पर उठाया करो,
खर्च करने से पहले कमाया करो
राहत इन्दौरी
दुश्मनो से निपटना तो हम खूब जानते है...मगर मेरे कुछ अपने है जो मोहब्बत से वार करते है...
गरीब की थाली में पुलाव आ गया है।
लगता है शहर में चुनाव आ गया है।
समाज की नज़र में दारू पीने वालेअमीर आदमी हैं तो ड्रिंक करता हैमिडिल क्लास हैं तो शराब पीता हैगरीब आदमी है तो वो बेवड़ा है
घर छोड़ा नादानी में बीवी छोड़ी जवानी में, देश बेचा बुढ़ापे में भक्त खुश हैं गुलामी में !
कभी-कभी कुछ लोग अपने बोले हुए अल्फाजों की वजह से,
हमेशा के लिए दिल से उतर जाते हैं।
किताबें इस लिए पढ़ो ताकि आप ,लोगों से बहस नहीं तर्क कर सको …
मंदिर बहुत बना लिया,
अब एक लंका भी बना दो,
जहा सीता जैसी बहन बेटी सुरक्षित रह सके ....!
रोज़ शाम को डूब जाता है ,सूरज को तैरना सिखाना है…
सबसे बेज़ार हो गया हूं मैं ज़ेहनी बीमार हो गया हूं मैं…!!!
कोई अच्छी ख़बर नहीं मुझमें यानी अख़बार हो गया हूं मैं…!!!
तस्वीरों पर फिल्टर इतना ही लगाएं कि मिलना पड़े!..
तो शर्मिंदगी ना हो…!
मैं बेरागी हूं… महादेव नहींपर तुम्हारी काया से अधिक तुम्हारी आत्मा को चाहूंगा..!
मैं प्रेमी हूँ… कान्हा नहींपर तुम्हारे नाम को सदैव अपने आगे लगाऊंगा..!
मैं मर्यादित हूं… श्रीराम नहींपर तुम्हारे अलावा मैं किसी और का न हो पाऊंगा..!