भूख मौत से बड़ी होती है, सुबह मिटाओ रात को फिर खड़ी होती है !!
शब्द ही नहीं, खामोशी भी चुभती है।
सूरत नहीं देखी जाती, सीरत देख लोजिस्म का क्या करना जब रूह एक हो
शादीशुदा मर्द की इज्जत,
औरत की वफादारी पर टिकी होती है।
नदियों का बहना और समंदर के खारेपन में
समाहित हो जाना;
प्रेम का इतना सा ही भाव है,
प्रेम प्रारंभ भी अंत भी और अनन्त भी है।
नेहा यादव
आंखों में स्वार्थ की पट्टी बंधी हुई है, रिश्ते अब गोरख धंधा हैं,
ईर्ष्या को मनुष्य गले लगाकर, केवल दौलत के पीछे अंधा है..!!
मैं गांव की अबोध लड़की कहां छुपा पाऊंगी तुम्हारे प्रेम को….मैं मुस्कुराती भी हूं, तो लोगों को शक हो जाता है…
क्या ही करूंगा मैं दुनिया जीत करजब आख़िर में तुझे ही हारना है….!!
अंत का भी एक अंत होता हैं,
कुछ भी कहाँ अनंत होता हैं...
जिस देश में नेता का बच्चा नेता बन जाता हो,
उस देश में ग़रीब का बच्चा ग़रीब बनना तय है।
मेरी काटों जैसी जिंदगी में फूल भर जाना,
प्रिय तुम बर्तन धुलने के बाद ऑनलाइन आ जाना...
फिर आखरी बार भी नहीं मिला मुझसे, जो मिलने वाला था "उम्र भर के लिए"
मुझे 'जिम जाने की क्या जरूरत है,
जीवन के बोझ तो उठा ही रहा हूं..!
रिश्ते कभी भी खत्म नहीं होते,
बस उनका रूप बदल जाता है......
मैं कितना भी गैर जरूरी हो जाऊं तुम्हारे लिए मेरे आंसुओ का बोझ कम ना होगा, और रह लो तुम कितना भी मेरे बिना खुश, मेरी सिसकियों का कर्ज़ तुम्हारे ज़िन्दगी से कम ना होगा...!!
ठहरी हुई ख़्वाहिशों की बंद किताब हूँ मैं..ज्यादा तो नहीं मगर खुद में ही, बेहिसाब हूँ मैं..!!
तुम पढ़ नहीं पाओगे उदासियां मेरी , कि मुस्कुराने के हुनर में हम इतने माहिर हैं ..!!
धैर्य की अपनी सीमाएँ हैं अगर ज़्यादा हो जाए तो कायरता कहलाता है।
चाणक्य