लगा के इश्क़ की बाजी सुना है दिल दे बैठे हो , मोहब्बत मार डालेगी अभी तुम फ़ूल जैसे हो ।।
एक घुटन सी हो रही थी मुझे संपूर्ण रात्रि ,घबराहट सी हो रही थी अपने ही अंधेरे कमरे में....भोर की सुनहरी रौशनी आई एक हल्की दस्तक लिए ,उदासी तमाम मेरे कमरे के दरवाज़े से फ़ौरन ही विदा हो कर नई...
बहुत संभाल के हमनें रखे थे पाँव मगर ,
जहा थे जख़्म वही चोट बार - बार लगी ।।
ख़्वाहिश है कि ख़ुद को भी कभी दूर से देखूँ !मंज़र का नज़ारा करूँ मंज़र से निकल कर !!
ना मोक्ष चाहिए ना स्वर्ग चाहिए मुझे अपने श्री हरि के चरण कमल चाहिए ❤
कोशिश करे ,शिकायत नहीं...
जिंदगी में अहमियत उसी को दो...
जिसमे अहम न हो..!
जिन्दगी संघर्षो का दरिया है इसे किस तरह,पार करना है ये सब अपना-अपना नज़रिया हैं…
खुद में झांकने के लिए जिगर चाहिएदूसरों की बुराई करने में हर शख्स माहिर होता है!
सिर्फ नंबर 'डिलीट' करने से यादें मिट पायी है क्या ?
तुझसे दरकार थी मसीहाई की
वरना मश्वरे तो वकील भी देते हैं
हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते है,मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिन्दुस्तान कहते हैं,
जो ये दीवार का सुराख है साज़िश है लोगों की,मगर हम इसको अपने घर का रोशनदान कहते हैं !
सर जिनके सलामत हैं,वो शर्मिंदा तो होंगे, याद आएगा जब उनको कि दस्तार कहाँ है? ~ अभिषेक शुक्ला
यह जादू तो है मेरे पास
कि मैं तकलीफ़ को कविता में बदल
देता हूँ, और सौभाग्य
को ख़ाक में।
देवी प्रसाद मिश्र
पैसों के अलावा अब किसी के
आने जाने से फर्क नहीं पड़ता।
सियासत को लहू पीने की लत है ,
वरना हमारे मुल्क में सब खैरियत है ।।
नाम लेती हो मेरा , बदतमीज ,तुम मुझे आप क्यूं नही कहती ।।
किसी की निंदा करने से, यह पता चलता हैं की ,
आपका चरित्र कैसा हैं न कि उस व्यक्ति का आचरण ...
बेटियां बहुत ही ख़ास होती हैं
परंतु फिर भी लोगों को बेटों की चाह रहती है !
जब तक सब अपने थे ज़िन्दगी साथ गुज़ारी है,
धीरे धीरे सब बदल गयें,अब हमारी बारी है।