ज़ुल्म यह है कि जिंदगी लावारिस सी हो गई है ,,
गुरुर यह है की ख्वाहिश से अब भी जिंदा है..!
जिंदगी पर भरोशा कीजिए जनाबभरोरों पर जिंदगी नहीं…!!
ये बारिश ये ठंडी हवा रिमझिम और ये मौसम,अगर तुम दूर ना होती पगली तो मिल के चाय पीते!!
लहरों का शोर नहीं सागर का 'शान्त' सुनो ,
जीवन में कुछ बड़ा करना है, तो एकान्त चुनो ..!!
चाँद को छू के चले आए हैं विज्ञान के पँख
देखना ये है कि इंसान कहाँ तक पहुँचे
- गोपालदास 'नीरज'
महीनों की आहट में मोहब्बत करते हैं लोग ,,
और दिनों के रिवाज में रिश्ते निभाते हैं लोग..!!
मुक्कमल करनी हो जिंदगी तो कोलाहल ना करेराहों में लगी ठोकरों का यूं मलाल ना करेअगर खुद पर यकीन है तो उसे पूरा कर कुछ कमाल करेयूं छोटी मोटी बातों पे ऊपर वाले से बेतुके सवाल ना करें
नुमाइश करने से बढ़ नही जाता इश्क़, इश्क़ वो भी करते है जो इज़हार नही करते।।
उसे बारिश का मौसम अच्छा लगता था , मुझे उसके साथ बारिश मे भींगना !!
व्यवहार में सुंदरता रखिए,
हर कोई चेहरे पर नहीं मरता
मेरी कमियों को गिनाया न करो
ये गिनाने से बढ़ भी सकती हैं
मालविका हरिओम
अंदर का ज़हर चूम लिया धुल के आ गए,
कितने शरीफ़ लोग थे सब खुल के आ गए.
जिसके लिए थे हम बहुत खासउसी ने बना दिया ज़िंदा लाश…!!
कहा जो मैंने कि मर जाऊँगा तो कहती हैं
तुम्हारे चाहने से जिंदगी थोड़ी निकलती है
कारवाँ गुज़र गया,
मेघा छाये आधी रात को
खिलते हैं गुल यहाँ
फूलों के रंग से..
गोपाल दास ‘नीरज’
✯||ज़रा ठहरो तो नज़र भरके देखे तुम्हे
जमीं पे चांद कहा बार बार आता है...||✯
समंदर
अब जो है, कुछ भी नहीं है हमारातेरा ख़्वाब आख़िरी था इन आँखों में_!!
सुलझी सी कविताएँ लिखते हैं, ख़ुद में ही उलझे से लोग..!
आज वो मेरे कफ़न का पूरा इंतज़ाम कर के आयी हैं, सुना है मेहंदी पर किसी और का नाम लिखा कर आयी हैं..!!
आदतें अलग है हमारी ज़माने से...रिश्ते कम ही सही लेकिन दिल से रखते हैं..!!