ये लफ्ज़ों के वादे ये किताबी मोहब्बत .. है आज के दौर में बड़ी खराबी मोहब्बत ... !!
समय से भी ज्यादा महंगी भावनाएं होती हैं ,
जो समझे उसी पर खर्च करो
बेशुमार इश्क़ है तेरे लिए मेरी इन आँखो में,बस नज़र भर के देख लो मुझे तुम… !!
गिद्धों कि तरह नोचा है अस्मत भी उनकी लूटी है,
इस देश में यत्र नार्यस्तु पूज्यंते कि सारी रस्में झूठी हैं,
और राम करे रक्षा सीता की, कृष्ण द्रौपदी का चीर बढ़ाते हैं,
कलयुग के हैं देव विलुप्त इसलिए सब "नं'गा नाच" कराते...
झूठी हैं इश्क़ की किताबें और शायर सभी ,
किसी ने रोते हुए लड़को के बारे मे नहीं लिखा ।।
होंगे दक्षिण, होंगे वामजनता को रोटी से काम
कोशिश करा करो सच बोलने की,झूठे रिश्ते ही टूटेंगे, इंसानियत का धर्म नही…
दया अगर लिखने बैठूं होते हैं अनुवादित रामरावण को भी नमन किया ऐसे थे मर्यादित राम
~अज़हर इक़बाल
औकात जो नाप रहे हो ज़ुबान की धार से ,
ज़रा ख़ुद में झाँक लो ज़मीर के दीदार से...
रात तो सब की एक ही है ,
बस अंधेरा हर किसी का अपना अपना है ..!!
तकलीफ देता है, इस कदर सच्चा होना
अब अच्छा नहीं लगता! यूं अच्छा होना
उनकी भी क्या इज्ज़त करना,
जिनकी हरकते कुत्तों जैसी हो।....
जब कभी मुझे तुम्हारी याद आती हैं तो मैं नहीं देखती हमारी तस्वीरें,मैं पढ़ती हूं तुम्हारी लिखी कविताएं जहां मैं और तुम हमेशा साथ होते हैं !
मन से जुड़कर तुझे तौलती हूं ,मैं हम से जुड़कर हमसे महकती हूं .. !!
आज शायद मुझे लगाले वो गलेईद का तो बहाना उसके पास है
कुछ परेशानियां इतनी बड़ी होती हैं,की उनके चक्कर में जिंदगी छोटी हो जाती है….
सुलझी सी कविताएँ लिखते हैं, ख़ुद में ही उलझे से लोग..!
एक शराब की बोतल दबोच रखी है,
तुजे भुलाने की तरकीब सोच रखी है...
गोबर पर चांदी का वर्क लगाने से हलवा नहीं बनता!!
तुमसे प्रेम करने के बाद महसूस हुआ है कि तुमसे बात करने से अक्सर मैं अपनी सारी परेशानियां,मुश्किलें भूल जाया करती हूं,जैसे एक सुकून का अनुभव होता है,जब तुम पास होते हो तो ऐसा लगता है जैसे ईश्वर से की...