अभी भरा नहीं था गम पति के जाने का,
उससे पहले रिश्तेदारों ने बेघर कर दिया,
भरे नहीं थे घाव एक मां कि चूड़ी टूटने के,
बच्चा बड़ा होने से पहले उन्हें लावारिस कर दिया..!!
मनुष्य कितना भी बड़ा क्यों न बन जाए,
उसे हमेशा अपना अतीत याद करते रहना चाहिए।
धीरे-धीरे
हर चीज बेवकूफ लगेगी...
जन्म, प्रेम, जिंदगी
और
आखिरी बेवकूफ़ी मृत्यु।
सुसिल ग़ाफ़िल
सपेरों ने सांपो को ये कहकर बंद कर दिया,
इंसान ही काफ़ी है इंसान को डसने के लिए।
रोचक रहस्य बनकर रहना सदा,
संसार समझ जाएगा तो
व्यक्तित्व इस्तेमाल किया जाएगा....!!!!
अंधेरे को कोसने से बेहतर है
कि एक दीया जलाया जाए।
औरत ने जनम दिया मर्दों को..
मर्दों ने उसे बाज़ार दिया
जब जी चाहा मसला कुचला
जब जी चाहा घुत्कार दिया
वो सूफ़ी का क़ौल हो या पंडित का ज्ञानजितनी बीते आप पर उतना ही सच मान।
मुझे उम्र के उस पड़ाव तक तेरा साथ चाहिए,आखिरी निवाला हो मेरा हांथ तेरा चाहिए..!!
कुछ चीजें शब्दों से नहीं..
साथ होने से खूबसूरत होती हैं..!!
दुनिया बड़ी भुलक्कड़ है केवल उतना ही याद रखती है,
जितने से उसका स्वार्थ सधता है।
हज़ारी प्रसाद द्विवेदी
बहुत संभाल के हमनें रखे थे पाँव मगर ,
जहा थे जख़्म वही चोट बार - बार लगी ।।
आग लगाऊं मैं तेरी डिग्रियों को, एक मेरा दिल तुझसे पढ़ा ना गया..
हराम की कमाई से शक्लें तो तो सवार सकते हो,नस्लें नहीं !!
आवाज लगाने पर तो जमाना सुन लेता है... जो ख़ामोशी सुने उसे मोहब्बत कहते हैं...!!
इन्सान की ख्वाहिशों की कोई इंतिहा नहींदो ग़ज़ ज़मीं भी चाहिए दो ग़ज़ क़फ़न के बाद
शीश महल ना मुझको सुहाएतुझ संग सुखी रोटी भाए….!!
तुम मिल सको तो मिल लेना,
कुछ कह सको तो कह लेना...
मैं जी नहीं पाया जुदा होकर तुमसे,
तुम जी सको तो जी लेना...
उनकी एक झलक पे ठहर जाती है नजर मेरी कोई
हमसे पूछे हमसफर दीवानगी क्या होती है..!!❤️
अंत का भी एक अंत होता हैं,
कुछ भी कहाँ अनंत होता हैं...