तकलीफ़ों से लदे तजुर्बे…अक्सर बेज़ुंबा रहते हैं.!

मेरे बस में नहीं हैं खुले आसमान में उड़ना ,इसलिए मैंने अपने पिंजड़े को ही अपनी दुनिया मान लिया हैं ..

सुकून चाहतें हो तो, कुछ बातें, कुछ यादें,कुछ सवाल, कुछ ख्याल दिल से आजाद कर दो...

ज़माना ख़राब है! भरोसा थोड़ा सोचकर समझकर करिये…यहां क़ातिल भी सिर्फ खुदा के बन्दों के "भेष" में आते है…

गिरता न कभी चेतक तन परराणाप्रताप का कोड़ा थावह दौड़ रहा अरिमस्तक परवह आसमान का घोड़ा था था यहीं रहा अब यहाँ नहींवह वहीं रहा था यहाँ नहींथी जगह न कोई जहाँ नहींकिस अरिमस्तक पर कहाँ नहीं

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