जितनी शिद्दत से तुझे चाहा था तूझे भूलने में उतनी ही ज़हमत उठानी पड़ रही है.. तुमने तोड़ा है इतने टुकड़ों में मुझे तुम क्या जानो खुद को समेटने में कितनी मशक्कत उठानी पड़ रही है.. ना रातों को चैन है ना दिन...

मेरी ज़िन्दगी में कुछ ऐसे लोग भी आए जो साथ बैठ कर हंसते थे...और मेरे पीठ पीछे मुझे ही डसते थे..!!

तुमने निकलते देखे होंगे ज़नाजे अरमानों के, हमने खुले आम दफनाई हैं ख्वाहिशें अपनी..!!

जिन्दगी में सबसे ज्यादा पीड़ादायक है, “मां” का जिंदगी में ना होना..!!

शाख से टूटे हुए फूल ने सबक दिया, ज्यादा अच्छे बनोगे तो लोग तोड़ देगें..

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