इलाज़ ना ढूंढ तू इश्क़ का, वो होगा ही नहीं, इलाज़ मर्ज़ का होता है इबादत का नहीं..!!
उसे बारिश का मौसम अच्छा लगता था , मुझे उसके साथ बारिश मे भींगना !!
उसे बुलाया नहीं जाता ना उसे रोका जाता है.... जिसपर अधिकार ना हो उसे ही मांगना पड़ता है , जो तुम्हारा होता है वो हर परिस्थिती मे तुम्हारा होता है और जो तुम्हारी पीड़ाओं का आक्रोश नहीं समझ पाता, उसके...
और फिर मैने उसे जाने दिया..... मैंने सदिया बिताई थी उसकी प्रतीक्षा मे... दिन को दोपहर, दोपहर को शाम , शाम को रात , रात को दिन होने में युग लग जाते हैं ये मैने सिर्फ जाना , नहीं जीया...
समझौता करो तो खुद से करो क्योंकि, अपने से फैसला लेना भी सही रास्ता होता है !!