अच्छा बुरा जैसा भी हूँ पर Original हूँ....!!

सस्ती लोकप्रियता की चाह और पैसों की भूख सरेआम संस्कारों के साथ साथ जिस्म को भी नंगा करती है।

भरोसा टूटा हैं वहम की दवाई मत दो, कहीं और जाकर शरीफ़ बनो मुझे सफ़ाई मत दो ..!!

मेरे जीवन की किताब का सबसे सुंदर अध्याय हैं आप

जम्हूरियत पर कस रहा फंदा ख़ुद को ख़ुदा समझ रहा बंदा बहलाया-फुसलाया, डराया भी बॉन्ड से भी जुटा लिया चंदा चुनाव की बिसात धर्म का दांव नफ़रत का तूफ़ान कभी पड़े न मंदा किसी को जेल इनके लिए खेल इन पर भी चलेगा वक़्त का...

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