मै लेखक हू लेकिन मै उद्दंडता नही लिखता,देश को पृथक करने वाली उग्रता नही लिखता,इंसान हू मै इसलिए हिन्दू मुस्लिम नही लिखता,हिन्दुस्तान के गौरव पर चोट करती अशिष्टता नही लिखता,और इश्क चाहती है मेरी कलम मै दुष्टता नही लिखता,मै द्वेष...

दिल चाहता हैं कि फिर अजनबी बनकर देखेतुम तमन्ना बन जाओ हम उम्मीद बनकर देखे

कोई हुनर है तो एक दफा आज़मा लीजिये खुद को.. ये जिंदगी है , दुबारा सिर्फ कहानियों में मिलती है!!!

वक्त बेवक्त छोटी छोटी खुशियों के संग,कुछ आधी अधूरी ख्वाहिशें भी ज़रूरी हैं ।इन आधी - अधूरी हसरतों से ही तोहमारी जिंदगी की खुशियां होती पूरी है || इच्छाओं और उम्मीदों के इस सफ़र मेंसिर्फ़ एक दिन और रात की दूरी...

अगर इस ज़िंदगी को दोबारा पाने का मौक़ा मिलेगा तो उस मौक़े को गवाँ देंगे हम .. ये भी क्या जिंदगी हैं ? हर छोटी छोटी ख्वाहिश को तरसे है हम ..

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