वक्त अच्छा हो तो लोग हाथ पकड़ते हैं ,और वक्त खराब हो तो गलतियाँ पकड़ते हैं ...
वो ख़्वाब रात काचाय साँझ कीबारिश की बूंदें रूमानीवही समां पुरानाधड़कनों से बतियानाबदला नहीं है कुछ भीवही मिज़ाज़ आशिकानाचलो निभाते हैं हम तुमवही पुराना याराना लेकर चुस्कियाँ चाय कीकरेंगे गुफ्तगू शायराना
जो बातें हम पी जाते हैं,वो बातें हमें खा जाती है..!!
तोहार पाँच किलो राशन मुँह पे फेंक देवे के..!साहेब आवे द इलेक्शन तोहके देख लेवे के..!
मेरा साया है मेरे साथ जहाँ जाऊँ मैंबेबसी तू ही बता ख़ुद को कहाँ पाऊँ मैं