तुम्हारे दिल में भी तूफ़ाँ उठा है हमें भी प्यार तुमसे हो चला है किसी अय्यार जैसे हो गए हो तुम्हारा नाम मुझको रट गया है तुम्हारी बात भी अब टालने में मुझे अब ख़ुद से लड़ना पड़ रहा है अजब सी कश्मकश है ज़िन्दगी में कि...

पटाखा न,आइटम न,मिर्ची न सेटिंग, वो लड़की ग़ज़ल है, ग़ज़ल ही रहेगी.

मुझे दिल की बात कहने दो..मुझे ज़हर खाके के मर जाने दो

हजार जताने वालों से एक निभाने वाला बेहतर है

तमाम शहर की हमदर्दी का क्या करता मुझे , किसी की ज़रूरत थी हर किसी की नहीं !!

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