मोहोब्बत, इबादत से आगे की शय हैकि हमने ख़ुदा को सनम कर लिया है ~ भास्कर शुक्ला

यूँ तो हर शाम उमीदों में गुज़र जाती हैआज कुछ बात है जो शाम पे रोना आया ~ शकील बदायुनी

मेरी ख्वाहिशों का शहर बहुत बड़ा थापर अब जिम्मेदारी की गलियों में अटक गया हूँ

भाई मौसम, इतना रोमांटिक मत होंकुछ लोग अभी भी सिंगल हैं

अन्न न भावै नींद न आवै, गृह-बन धरै न धीर रे।कामिन को है बालम प्यारा, ज्यों प्यासे को नीर रे।

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