तेरे लौटने के इंतेजार में,तेरी यादों से मोहब्ब्त हो गई….

हम दोनों धोखा खा गए हैं..मैंने तुम्हें औरों से अलग समझा, और तुमने मुझे औरों जैसा समझा..!!

अपने शब्दों को उठाओ आवाज को नहीं ,वह बारिश है जो फूल उगाती है तूफ़ान नहीं !!

हादसे इंसान के संग,मसखरी करने लगे…!लफ़्ज़ कागज़ पर उतर करजादूगरी करने लगे… !क़ामयाबी जिसने पाई,उनके घर तो बस गये…. !जिनके दिल टूटे वो आशिक़,शायरी करने लगे….!!

तुम्हारे पाँव के नीचे कोई ज़मीन नहींकमाल ये है कि फिर भी तुम्हें यक़ीन नहीं ~ दुष्यंत कुमार

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