अपनी रुह का लिबास भी दे दूँगा तुझे…तू मुझमें रहने का पहले फैसला तो कर..!!
जो गलत है उसका विरोध खुलकर कीजिए,चाहे राजनीति हो या समाजइतिहास आवाज उठाने वालोंपर लिखा जाता है तलवे चाटने वालों पर नहीं।
दुआ करना दम भी उसी तरह निकले…जिस तरह तेरे दिल से हम निकले…!!
वादों की तरह इश्क भी आधा रहा,मुलाकाते कम रही इंतजार ज्यादा रहा….!!
ये सोचना ग़लत है के’ तुम पर नज़र नहीं,मसरूफ़ हम बहुत हैं, मगर बे-ख़बर नहीं
हम आपके इशारे पे घर-बार छोड़ दें ?दीवाने हैं ज़रूर ! मगर इस क़दर नहीं !!
~ आलोक श्रीवास्तव