बुरा तो तब लगता है जब छिपकली और कॉकरोच से,डरने वाली लड़की दिल से खेल जाती है.
फिक्र से चेहरे कि चमक मिटा लेती है,गंदी नियत लबों से उसके मुस्कान हटा लेती है,
पीड़ा भी झलकती है उसकी आंखों में,लेकिन खुद को वो निःशब्द बना लेती है,
और अपनी औकात से ज्यादा सहती है वो,अपमानित हो चरित्र तो खुद...
हर नारी में सीता भी होगी हर पुरुष में राम भी होगाअंतर्मन रखो शुद्ध अपना तुम्हीं में भगवान भी होगा
राजेश गौरी
गिले शिकवे तमन्ना आरज़ू इज़हार क्या करते ,अटल थे फ़ैसले उसके तो फिर तकरार क्या करते
मैं ख़ुद भी हूँ अपने आप के पीछे पड़ा हुआ,
मेरा शुमार भी तो मेरे दुश्मनों मैं है ।।