लोग देखतें हैं तमाशा सिक्का फेंक केसड़कों पे मजबूरी करतब करवाती है एक दिन मर जाना है माना सबको मगरफिर क्यों ये आग पेट कि हर रोज जलाती है

वो जो ऊपर बैठा है ना.. जिसे हम सब परमेश्वर कहते है..वो कुछ भी कर सकता है..सिर्फ सब्र और विश्वास रखें

ये वाकया मेरी आँखों के सामने का है,शराब नाच रही थी सारे गिलास बैठे रहे.

◈•✦───•✿✺『💠』✺✿•───✦•◈ सफ़र में होती है पहचान कौन कैसा है ❖◈•┼•◈❖ ये आरज़ू थी मेरे साथ तू सफ़र करता! ◈•✦───•✿✺『💠』✺✿•───✦•◈

बांधते होंगे इश्क़ में लोग मन्नत के धागे….मैंने अपनी आंखें बांधी हैं प्रतीक्षा की चौखट पर..!♥️

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