वृंदावन की कूंज गली मेंमही बैचने में गईनंद जी के लाल मुझे सामने मिले जबमें तो शरमा गई रेकनैया तेरी मुरली बैरन भई

कुछ ख़्वाब तुमनें तोड़ दिए..और कुछ हमनें देखने छोड़ दिए..!!

भटकने की आरजू किसको है ,मिल जाओ तुम तो ठहर जाऊं मैं..❤️

तेरे वास्ते फलक से चांद लाए थे सोलह सत्राह सितारे संग बांध लाए थे ज़रा सी देर क्या हुई हमे आने में तुम चले गए किसी और की जिंदगी सजाने में…!!

मैं खुद की तस्वीरें अब नहीं खींचताकारण बचपन की यादे रुलाती है...

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